PM Kisan Yojana के तहत किसानों को हर साल 3 किस्तों में ₹2000-₹2000 की आर्थिक सहायता दी जाती है। 2026 में किसानों को सबसे ज्यादा इंतजार 22वीं किस्त का था और अब सरकार ने इस पर अंतिम मुहर लगा दी है। नए अपडेट के मुताबिक 22वीं किस्त सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजी जाएगी।
22th किस्त किस दिन आएगी?
• सरकारी सूत्रों और विभागीय जानकारी के अनुसार 22th किस्त की संभावित तारीख तय हो चुकी है और जल्द ही आधिकारिक घोषणा भी आ जाएगी।
• किस्त को फरवरी–मार्च 2026 के पहले सप्ताह में जारी करने की तैयारी है।
• कई जिलों में डेटा वेरिफिकेशन पहले ही पूरा किया जा चुका है।
किसानों को मिलेंगे ₹2000
• PM किसान योजना में किस्त की राशि वही ₹2000 रहेगी और तीनों किस्त मिलाकर किसानों को साल में ₹6000 का लाभ मिलता रहेगा।
• 22th किस्त भी DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सीधे खाते में भेजी जाएगी।
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ई-केवाईसी और बैंक वेरिफिकेशन अनिवार्य
22वीं किस्त के लिए सबसे जरूरी प्रक्रिया है:
• e-KYC complete
• बैंक खाता आधार से लिंक
• NPCI mapping done
• मोबाइल नंबर अपडेट
कई किसानों की पिछली किस्त KYC की वजह से रुकी थी, इसलिए इस बार विभाग पूरी प्रोसेस को तेजी से क्लियर कर रहा है।
किसानों को क्या करना होगा?
22वीं किस्त आने से पहले किसानों को बस तीन चीजें कन्फर्म करनी होंगी:
✔ PM Kisan पोर्टल पर नाम सही
✔ बैंक IFSC व खाता सही
✔ आधार-लिंक और NPCI क्लियर
LIVE स्टेटस कैसे चेक करें?
किस्त रिलीज के बाद किसान अपना स्टेटस ऐसे चेक कर सकेंगे:
• PMKISAN पोर्टल में जाएं
• Beneficiary Status खोलें
• आधार नंबर/मोबाइल नंबर डालें
• ‘Get Status’ क्लिक करें
यहां किस्त, तारीख, और पेमेंट की पूरी जानकारी दिखाई देगी।
किसानों के लिए राहत क्यों जरूरी?
खेती-बाड़ी में बढ़ती लागत, खाद-बीज के दाम और डीजल-पानी खर्च को देखते हुए PM किसान की किस्त किसानों के लिए सीधी मदद का काम करती है, 22वीं किस्त रबी और गर्मी की फसल के समय बहुत काम आएगी।
क्या नए किसानों को भी मिलेगा लाभ?
जो किसान 2025 के अंत तक योजना में जुड़े हैं, उन्हें भी 22th किस्त मिल सकती है—लेकिन उनकी e-KYC & Verification पूरा होना जरूरी है।
निष्कर्ष
PM किसान की किस्त पर देरी और अफवाहें अक्सर किसानों को चिंतित करती हैं, इसलिए 2026 में डेट फाइनल होना एक सकारात्मक संकेत है, सरकार इस बार किस्त को बिना देरी के ट्रांसफर करने के मूड में है, जिससे किसानों को फसल प्रबंधन और घरेलू खर्च में राहत मिलेगी।